प्रदेश में कला अनिवार्य विषय नहीं जबकि सीबीएसई नें अनिवार्य करने के जारी किए निर्देश

संजीव राणा ब्यूरो- देश सरकार द्वारा बेरोजगार कला अध्यापकों को आर टी ई का हवाला देकर अंधेरे में रखा जा रहा है| यह कहना है प्रदेश के उन हजारों

बेरोजगार कला अध्यापकों का जो पिछले कई वर्षों से सरकारी स्कूलों में अपनी नियुक्तियों की आस लिए बैठे हैं|

जानकारी के अनुसार प्रदेश के स्कूलों में इस समय पन्द्रह सौ के करीब कला अध्यापकों के पद रिक्त चल रहे हैं। इनका कहना है कि प्रदेश सरकार से रिक्त

पदों को भरने की मांग करने पर कभी आरटीई तो कभी स्टैंडिंग पूल का हवाला दिया जाता है। विडंबना यह है कि प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों में उच्च

गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करने का दावा करती है लेकिन जब स्कूल में पढ़ाए जाने वाले विषय के अध्यापक ही उपलब्ध नहीं होंगे तो गुणवत्ता की बात

करना बेमानी है। ऐसे में अभिभावक भी सरकारी स्कूलों से मुंह मोड रहे हैं। कला अध्यापकों के मुताबिक कला का हर विषय के साथ गहरा संबंध है व कला

समाज का दर्पण है ।अगर कोई बच्चा अपने भावों को प्रकट करना चाहता है तो वह कला के माध्यम से प्रकट कर सकता है।

29 अप्रैल को राजकीय सी एंड वी अध्यापक संघ की बैठक के दौरान शिक्षा निदेशक मनमोहन शर्मा व उपनिदेशक हितेश आजाद नें स्कूलों में कला विषय

को अनिवार्य करने का आश्वासन दिया था लेकिन आज तक कोई भी फैसला नहीं लिया गया। जबकि कला विषय के महत्व को देखते हुए सीबीएसई द्वारा

इसे अनिवार्य विषय घोषित करने के आदेश जारी किए गए हैं। प्रदेश के कला अध्यापकों नें सरकार से कला विषय को अनिवार्य करने व रिक्त पदों को शीघ्र भरने का आग्रह किया है।

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