अवदेश भारद्वाज – हमारा प्यारा भारतवर्ष एक कृषि प्रधान देश है हालांकि कई प्रदेशों में किसानों द्वारा सूखा होने के कारण आत्महत्या के मामले भी आए हैं परंतु हमारा देव भूमि हिमाचल राज्य प्राकृतिक साधनों व संसाधनों से भरा है और हमारी मान्यवर भारत सरकार व मान्यवर राज्य सरकारों ने यहां पर निवेश निवेशकों को लोगों को रोजगार ,आधारभूत सुविधाएं दिलाने के लिए व निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया।

परंतु यह किसको पता था कि इन कारखानों के भारतवासी व राज्य बासी प्रबंधक ही 1 दिन यहां की जनता को गिद्ध की तरह नोच खाने लगेंगे। हालांकि एसीसी कारखाना बरमाना लगभग 13 वर्ष पूर्व जब लाफार्ज होलसेम ग्रुप जो स्विजरलैंड से ऑपरेट करता है , इसके सिद्धांतों यानी सुरक्षा , स्वास्थ्य ,रोजगार , 0 नुकसान के साथ संचालन व निर्मित व कार्बन तटस्थ वातावरण इत्यादि हैं , इसका पता

चलते ही सभी आठ प्रभावित व विस्थापित पंचायत के ग्रामीणों में खुशी की लहर चल पड़ी कि अब हमारे गांव भी स्विजरलैंड की तर्ज पर विकसित किए जाएंगे वह ऊपर से हमारी मान्यवर भारत सरकार ने 2% कुल लाभ का का विस्थापित व प्रभावित पंचायतों पर निवेश करने का सख्त कानून इन कारखानों को बनाया है क्योंकि यह कारखाने दिन-रात खनन करके व प्रदूषण आदि करके हमारे साधनों व संसाधनों को लूट रहे हैं।

परंतु एसीसी प्रबंधन व मुख्य पदाधिकारी सीएसआर हेड माननीय श्री जितेंद्र कपूर जी ने जो जो चौमुखी विकास किए हैं दुनिया जानती है परंतु दो झलके आज सामने आई। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग 5 करोड़ से ऊपर हमीरपुर में सिंथेटिक ट्रैक एसीसी प्रबंधन द्वारा दी गई राशि से बनाया वह घूमांरवि में भी एक बड़ी राशि द्वारा भव्य कॉलेज का निर्माण एसीसी प्रबंधन द्वारा दी गई राशि से बनाया गया इस पर ग्राम वासियों में बहुत आक्रोश है कि रोजगार राज्य से बाहर व आधारभूत सुविधाएं जिले से बाहर जा रही है।

ऊपर डिस्प्ले पर लगी तस्वीर कुन्नू गांव पंचायत पंजगाई गांव की है जहां खनन क्षेत्र यानी जो कारखाने का भोजन है, यह गांव खनन क्षेत्र से 300 मीटर की दूरी पर है परंतु यहां कोई बड़ी व्यवस्था तो क्या , ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आज तक एक पैसा भी सीएसआर के द्वारा जिसके हेड जितेंद्र कपूर जी है नहीं लगाया गया .
ग्रामीणों ने यह भी उग्र रूप से आरोप लगाया कि रोजगार तो दूर की बात यह प्रबंधन हमारा कृषि धन व पशुधन भी नोच रहे हैं ग्रामीणों ने माननीय उच्च प्रबंधन से गुहार लगाई है कि इस तरह के प्रबंधकों पर जल्द से जल्द उचित कार्यवाही करके हमें इंसाफ दिलाएं .

आप ग्रामीणों की जमीन देख रहे हैं जहां पर सीएसआर के पैसे द्वारा बैरिकेड जमीन की जानी थी वहां पर ग्रामीण विवश हैं वहां पर लिफाफे कमीजे टांग रखी है वह ग्रामीणों ने बताया कि रात को भी हमें वहां पर जानवरों से जंगली जानवरों से जो एसीसी खनन के कारण आते हैं रात भर पहरा देना पड़ता है

Leave a Reply