कृषि मंत्री ने केंद्र सरकार से किया कृषि विज्ञान केंद्र ऊना में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोलने का आग्रह।

भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् की 93 वीं वार्षिक बैठक नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में हिमाचल प्रदेश से कृषि मंत्री वीरेन्द्र कंवर व कृषि निदेशक नरेंद्र कुमार धीमान ने भाग लिया।

इस अवसर पर कृषि मंत्री ने प्रदेश के कृषि सम्बंधित मुदों पर चर्चा करते हुए प्रदेश में पोटेटो सिस्ट निमेटोड की समस्या को केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखते हुए कहा कि राज्य में आलू आय का मुख्य साधन है, तथा लगभग 15,100 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू का उत्पादन किया जाता है, जिसके लिए लगभग 3 लाख क्विंटल बीज आलू के प्रमाणित बीज की आवश्यकता प्रतिवर्ष होती है। प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा आलू विकास केन्द्रों पर लगभग 55 हेक्टेयर क्षेत्र में फाउंडेशन बीज आलू का उत्पादन किया जाता है।

उन्होंने कहा कि गत 4 वर्षों से प्रदेश के आलू विकास केन्द्रों पर बीज आलू का उत्पादन कार्य पोटेटो सिस्ट निमेटोड के कारण प्रभावित हुआ है, जिससे प्रदेश के सरकारी फार्मों पर फाउंडेशन बीज आलू का उत्पादन संभव नहीं है, जिससे किसानों की आर्थिकी को बहुत नुकसान हो रहा है। इस समस्या बारे भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् द्वारा केंद्रीय आलू अनुसन्धान संस्थान के माध्यम से सिस्ट निमेटोड के प्रबंधन हेतु विकसित तकनीक को प्रदेश सरकार और किसानों को हस्तांतरित किया जाए ताकि इस समस्या से निदान पाया जा सके। कृषि मंत्री ने इस अवसर पर इस तकनीक को प्रयोग में लाने की अनुमति प्रदान करने का आग्रह किया।

उन्होंने बताया की इस समय ऊना जिले में बड़े स्तर पर आलू का उत्पादन होता है, इसे मध्यनजर रखते हुए वीरेंद्र कंवर ने केंद्र सरकार से कृषि विज्ञान केंद्र ऊना में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोलने का आग्रह किया। इसके अतिरिक्त दलहन व तिलहन फसलों पर आधारित परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान करने का भी आग्रह किया, ताकि प्रदेश में दलहनों व तिलहनों की फसलों को बदावा दिया जा सके।

कृषि मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने केंद्र सरकार का राज्य सरकार की ओर से राज्य में कृषि सम्बंधित कार्यक्रमों को बढावा देने के लिए समयदृसमय पर सहायता प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया।