बिलासपुर: बछड़ी गांव के लोगों ने किया श्रीमद्भागवत कथा में श्री कृष्ण लीलाओं का श्रावण।

बिलासपुर घुमारवीं:11 मई 2022 उपमंडल घुमारवीं के तहत आने वाली ग्राम पंचायत मोरसिधी के गांव बछड़ी में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन पंडित प्रकाश चन्द गर्गाचार्य जी ने भगवान श्री कृष्ण की लीलाओ का वर्णन किया । पूतना ने मनोहर नारी का रूप धारण किया और आकाश मार्ग से सीधा नंदबाबा के महल में गई और सोते हुए कृष्ण को गोद में उठाकर अपना दूध पिलाने लगी। पूतना का मनोहर रूप देखकर यशोदा माता और बलराम की माता रोहिणी भी मोहित हो गए और उनको दूध पिलाने से नहीं रोका। उन्होंने सोचा कि यह स्वर्ग से उतरी देवकन्या है, जो हमारे लाला को देखने के लिए आई है।

अन्तर्यामी श्रीकृष्ण सब जान गए और उन्होंने अपने दोनों हाथों से कुच धाम करके उसके प्राण समेत दुग्धपान करने लगे। इससे पूतना चिल्लाने लगी और बाल गोपाल को हटाने लगी लेकिन भगवान हटे नहीं। वह इतनी परेशान हो गई कि वह अपने असली रूप में आकर चारो तरफ चिल्लाने लगी। इससे गोकुलवासी भयभीत हो गए।

पूतना अपने राक्षसी स्वरूप में ही पृथ्वी पर गिर गई और जब गिरने की आवाज सुनाई दी तब नंदबाबा, यशोदा माता और रोहिणी उसके पास दौड़े-दोड़े गईं। वहां जाकर देखा कि कृष्ण भयंकर राक्षसी के स्तनपान कर रहे थे। उन्होंने तुरंत बच्चे को उठाया और अपने पास रखकर बोले कि आज लल्ला की रक्षा भगवान ने खुद की है। भगवान के हाथों वध होने के बाद पूतना को लेने के लिए बैकुंठ धाम से विमान आया, जो उसे विष्णु लोक ले गया और वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो गई।

पूतना इतनी भयंकर और विशाल थी कि गोकुलवासी उसके अंतिम संस्कार के लिए सोचने लगे कि किस तरह इसका दाह संस्कार किया जाए। तब ग्वालों ने पूतना के अंगों को काट-काट कर उसका अंतिम संस्कार किया। जब उसका अंतिम संस्कार हुआ तब उसके शरीर से चंदन की खुशबू आने लगी थी और वह खुशबू पूरे वातावरण में फैल गई, इसके वर्णन भगवत पुराण में मिलता है।