पुलिस भर्ती पेपर लीक मामला सीबीआई को सौंपने पर मंथन।

हिमाचल प्रदेश सरकार पुलिस कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा के पेपर लीक मामले को सीबीआई के सुपुर्द करने पर मंथन कर रही है। सरकारी स्तर पर इस मामले में बैठकें हो रही हैं। सरकार इसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश से भी जांच कराए जाने की संभावना पर विचार कर रही है। बीते दिन बुधवार को ही पुलिस भर्ती कमेटी के अध्यक्ष रहे आईपीएस अधिकारी आईजी जेपी सिंह का सरकार ने तबादला कर दिया है। विशेष जांच दल कमेटी में शामिल सभी छह अधिकारियों के भी बयान दर्ज करने की तैयारी है।

सूत्र बताते हैं कि अब तक इस मामले में ऊना, हमीरपुर, मंडी, कांगड़ा सहित अन्य जिलों में करीब 350 परीक्षार्थियों से पूछताछ की जा चुकी है। पेपर लीक मामले में अब तक 15 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इनमें से कुछ न्यायिक हिरासत और कुछ पुलिस रिमांड पर चल रहे हैं। पेपर लीक मामले के तार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उतर प्रदेश से जुड़ रहे हैं। ऐसे में जांच टीम हर पहलू को गंभीरता से खंगालते हुए अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है।

उत्तर प्रदेश और दिल्ली के साथ ही विशेष जांच दल के सदस्य पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा में भी दबिश दे चुके हैं। अब तक की जांच में एसआईटी के समक्ष कई तथ्य सामने आए हैं। छह से आठ लाख रुपये प्रति प्रश्नपत्र लिए गए हैं। यह सारा सौदा नकदी में हुआ है। ऐसे में आरोपियों के मोबाइल फोन से कई राज खुल सकते हैं। एसआईटी के कुछ सदस्य धर्मशाला से शिमला लौटकर आरोपियों के फोन और बैंक खातों के रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। आवाज पहचानने के लिए मोबाइल फोन फोरेंसिक प्रयोगशाला जुन्गा भेजे गए हैं।

याचिका पर सुनवाई 26 मई तक टली

प्रश्नपत्र लीक होने के मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से करवाने के आग्रह को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई 26 मई के लिए टल गई है। इस मामले पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष हुई। प्रार्थी ने मामले की जांच सीबीआई से करवाने के आग्रह को लेकर याचिका दाखिल की है। हाईकोर्ट ने फि लहाल इस मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी नहीं किया है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने इस परीक्षा को रद्द करते हुए यह परीक्षा नए सिरे से आयोजित करने का निर्णय लिया है।