परीक्षा के दौरान तनाव से रहे दूरः- कैलाश चांदना लेखक कैलाश चांदना, फाउंडर ब्रिज कला एकेडमी।

लेखक कैलाश चांदना _ फाउंडर ब्रिज कला एकेडमी

बोर्ड परीक्षा का मौसम शुरू हो चुका है, दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हो रहे छात्र तैयारी में जी-जान से जुटे हुए है, स्नातक के सेमेस्टर परीक्षा भी होने वाली है, जो छात्र परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उनमें थोड़ा बहुत तनाव आना लाजिमी है, लेकिन यह तनाव उनके परीक्षा या रिजल्ट पर गलत प्रभाव न डाल दे
इससे बचना और साथ ही तैयारी का ध्यान रखना आवश्यक है।
ब्रिज कला एकेडमी के फाउंडर कैलाश चांदना ने बताया बोर्ड परीक्षाएं किसी छात्र के बेहतर भविष्य की बुनियाद डालती है, इन परीक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर अच्छे कोर्स और संस्थान में प्रवेश का रास्ता बनता है,
अच्छे अंकों के दबाव में कई बार छात्र उलझनों में फंस जाते हैं, जिससे साल भर की अपनी तैयारी पर उनका विष्वास डगमगा जाता है, इनका असर परीक्षाओं के परिणाम पर पड़ता है,
हर पेपर को लेकर तनाव, सिलेबस अधूरे रह जाने का तनाव, जैसे कई कयास छात्रों की नींद हराम कर देते हैं
ऐसे में ऐसा क्या किया जाएं, ताकि तनाव भी न हो और परीक्षा परिणाम भी अनुकूल आए,
इतना तो स्पष्ट है कि तनाव कभी भी किसी को मन के अनुसार परिणाम नहीं देते, बल्कि मेहनत और धैर्य से ही बेहतर परिणाम हासिल किया जा सकता है।

*लायें जीवनशैली में सुधार*-
ज्यादातर छात्र परीक्षा के दिनों में खुद के प्रति काफी लापरवाह हो जाते हैं और उनकी जीवनशैली बदल जाती है, उनके न तो सोने का समय तय होता है और ना ही खाने पीने का, बस पढ़ाई करते रहते हैं, इसका उनके शरीर पर बुरा असर पड़ता है, ऐसी समस्याओं से बचने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ शरीर को भी पर्याप्त आराम देने की जरुरत है, पौश्टिक भोजन करें, नियमित व्यायाम करें और समय का प्रबंधन सही ढंग से करें, जिससे पढ़ाई को लेकर तनाव न हो, इससे मानसिक शांति मिलेगी और छात्र अपने विषय को सही तरीके से याद कर पाएगें।

*हमेशा सकारात्मक बने रहे*;
परीक्षा और इसके परीणाम को लेकर हमेशा सकारात्मक रहे और इसे लेकर अपने दिमाग पर अधिक दबाव ना डालें। अक्सर यह बात भी मन में आती है कि यदि परीक्षा में बेहतर अंक नहीं आए, तो दोस्त और परिवार के सदस्य की नजरों में गिर जाऊंगा, अच्छे संस्थान में एडमिशन नहीं मिलेगा, जैसी बातों को लेकर परेशान ना हो, खुद पर विश्वास रखें
और सकारात्मक होकर यह सोचे कि जब आपने ईमानदारी से इतनी मेहनत की है या कर रहे हैं तो परिणाम भी अच्छे आएंगे,
आपके सोचने का नज़रिया ही आपकी याद रखने की क्षमता को कम या ज्यादा रखेगा
ध्यान रखें कि कोई भी परफेक्ट नहीं होता और टाॅपर भी यह दावा नहीं कर सकता कि उसे पूरे सिलेबस पर कमांड है।

*आत्मविष्वास के साथ करें पढाई*;
अक्सर परीक्षा नजदीक आते ही छात्र असमंजस में पड़ जाते हैं कि वे क्या पढ़ें और क्या छोड़े,
अक्सर छात्र यह सोचकर परेशान रहते है कि यदि कोई प्रश्न इस अमुक अध्याय से पूछ दिया, तो क्या करेंगे,
यह सोच गलत है, जब परीक्षा की तारीख नजदीक आ गई हो, तो नए विशय या नए अध्याय पढ़ना बंदकर दें,
अभी तक आपने जो पढ़ा है उससे प्रति गंभीर हो और इस तरह तैयारी करें कि आपके पढ़े हुए विषय या अध्याय से यदि कोई प्रष्न आता है, तो उसमें ज्यादा अंक आने की संभावना होती है,

विषयों को दोहराना जरुरी है, यदि आपने कोर्स के दौरान अधिकतर सिलेबस कवर कर लिया है, तो आपको अच्छे अंक आयेंगे और एक साथ अध्याय की पढाई छूट जाने से तैयारी या परीक्षा अंक में ज्यादा अंतर नहीं आएगा,
परीक्षा नजदीक आने पर जिन प्रश्नों या विषयों पर आपकी पकड़ है, उन्हें कम
और जिनमें पकड़ कम है उनकी अधिक प्रैक्टिस करें

*मदद लेने से हिचके नहीं*;
परीक्षा की तैयारी करते समय यदि किसी भी प्रश्न में उलझ गए हो,
तो समय बबार्द करने के बजाय अपने शिक्षक या माता पिता या बड़े भाई बहन से जरुर मदद ले,
परीक्षा की उल्टी गिनती शुरू होने के साथ ही प्रैक्टिस पेपर की मदद से अपनी तैयारी को बेहतर बनाएं,
परीक्षा की तैयारी के दौरान रात भी जागना बिल्कुल भी समझदारी नहीं है, नींद पूरी ना होने से सोचने की क्षमता और आत्मविश्वास कम होने की संभावना बन जाती है
बेहतर होगा, आप एकाग्रचित होकर शांतमन से तैयारी को अंतिम रूप दें।

*और अंत में मेरी जांच और सोच पर ध्यान दीजिये*
आखिर में सच जान लीजिये , काम की असली दुनिया में काम देने वाले लोग मार्कशीट या नंबर्स पर ध्यान नहीं देते हैं , आधे से ज्यादा काम देने वाले लोग इतना ही कहते हैं कि 2 हफ्ते (लगभग 15 दिन काम करके दिखाओ) , मतलब ज्यादातर काम देने वालों की दुनिया में मार्क्स देखकर नही बल्कि काम देखकर काम दिया जाता है, इसलिए मार्क्स कम आएं या ज्यादा , आप बस काम सीखने पर ध्यान दीजिये
आप एक काम और सीखने पर ज़रूर ध्यान दीजिये और वो है मार्केटिंग को सीखना और दुसरे अपनी बातों को , अपने पक्ष को दूसरों तक अच्छे तरीके से पहुँचाना
मैं आपको यकीन दिलाता हूँ कि आपको काम देने वाले लोग ज्यादातर ऐसे ही मिलेंगे तो इसलिए मार्क्स को दुखी होकर मत देखिये , बस मार्केटिंग और अपनी बात को अच्छे से रखने की कला ज़रूर सीखें.
और अच्छे मन से, खुश मन से, सकारात्मक होकर मेहनत और लग्न से अपनी पढ़ाई को पूरा करें
KAILASH CHANDNA