एचआरटीसी बसों की छतों से हटेंगे कैरियर, पुष्प उत्पादकों में हड़कंप

वे हर साल फूलों का 10 करोड़ का कारोबार करते हैं। बड़ी गाड़ी या जीप में फूल भेजें तो अधिक नमी होने के कारण फूल दिल्ली पहुंचते पहुंचते खराब हो जाते हैं। फूल को अगर कायदे से पैकिंग सामग्री में पैक करना हो तो लागत काफी अधिक होगी। पुष्प उत्पादकों के लिए यह व्यवस्था करना नामुमकिन है।

केवल परवाणू में ही फूल मंडी है, जो इस साल शुरू हुई है। सूबे के हर पुष्प उत्पादक को वहां पहुंचना मुश्किल होगा। सोलन, कांगड़ा, चंबा, कुल्लू और मंडी के पुष्प उत्पादक एचआरटीसी की बसों की छत पर लगे कैरियर में फूल की पेटियां रखकर दिल्ली तक पहुंचाते हैं। प्रदेश में कारनेशन, जिप्सोफिला, लिलियम, लिमोनीयम, इष्टोमा और क्रिसेंथमा फूलों की पैदावार होती है।

केंद्र सरकार के परिवहन निगम की बसों से कैरियर हटाने के निर्णय को लेकर सराज फ्लोरीकल्चर एसोसिएशन जल्द मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिलेगी।
– भूपेंद्र पाल, अध्यक्ष सराज वैली फ्लोरीकल्चर एसोसिएशन

नई बसें आई हैं, उनमें कैरियर की सुविधा नहीं है। पुरानी बसों के कैरियर हटाने के आदेश मिलते ही उन्हें भी हटा दिया जाएगा।