उपायुक्त ने की जिला स्तरीय बायो-मेडिकल वेस्ट (अपशिष्ट) प्रबंधन समिति की बैठक की अध्यक्षता

हमीरपुर, 12 जून। जिला स्तरीय बायो-मेडिकल वेस्ट (अपशिष्ट) प्रबंधन समिति की बैठक उपायुक्त श्री हरीकेश मीणा की अध्यक्षता में आज यहां उपायुक्त कार्यालय कक्ष में आयोजित की गयी, जिसमें बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियम-2016 और संशोधित नियम, 2018 के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गयी।

बैठक को संबोधित करते हुए श्री हरीकेश मीणा ने कहा कि जिला के अंतर्गत राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज), हमीरपुर सहित सभी सरकारी व गैर-सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इन नियमों की अक्षरशः अनुपालना सुनिश्चित करने

के लिए सभी संबंधित एकजुट होकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक संस्थान में रंगों के आधार पर बायो-मेडिकल वेस्ट को अलग कर उसके निस्तारण का प्रावधान है जिनमें पीला, लाल, सफेद (पारदर्शी), नीला तथा हरा शामिल है। इन अपशिष्ट को इन्हीं कलर कोड के आधार पर एकत्र व पैक करके कॉमन बायो मेडिकल वेस्ट

ट्रीटमेंट अथवा गहराई में गड्ढा खोद कर निस्तारित करने का प्रावधान है। जिला में उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक रंगों के आधार पर डस्टबिन सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि इन अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्थानीय निकायों तथा संबद्ध गैर सरकारी संगठनों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रहती है। उन्होंने इन सभी से आग्रह किया कि वे एक कार्य योजना तैयार करें और तय समयावधि में इसका उचित निस्तारण

सुनिश्चित बनाएं। हमीरपुर स्थित मेडिकल कॉलेज से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के उचित प्रबंधन के लिए भी विशेष प्रयास करें। इस संस्थान के अतिरिक्त पूरे जिला में सरकारी क्षेत्र के 192 स्वास्थ्य संस्थान स्थापित हैं। इन सभी को चरणबद्ध

ढंग से बायो सेनिटाईजर के साथ जोड़कर अपशिष्ट पदार्थों का नियमानुसार निस्तारण किया जा रहा है। जिला में स्थापित निजी स्वास्थ्य संस्थानों को भी इसके दायरे में लाया गया है।

उपायुक्त ने निर्देश दिए कि बायो मेडिकल वेस्ट के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करें, ताकि आम जनता भी स्वास्थ्य संस्थानों में बायो मेडिकल वेस्ट के उचित निस्तारण के प्रति सजग रहें। इसके लिए स्वास्थ्य संस्थान

परिसर में समुचित संकेतक इत्यादि लगाना भी सुनिश्चित करें। अन्य माध्यमों से भी लोगों को इस बारे में जागरूक करने के लिए अभियान चलाएं, ताकि किसी बिमार व्यक्ति का अपशिष्ट किसी स्वस्थ व्यक्ति को संदूषित न कर सके।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अर्चना सोनी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रिंसीपल साईंटिफिक ऑफिसर डॉ. टी.बी. सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुनील वर्मा के अतिरिक्त सभी खंड चिकित्सा अधिकारी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के

अधिकारी व स्थानीय निकायों व गैर सरकारी संगठन सुरक्षा के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

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