सैर सपाटे के लिए बढ़ाये बजट की माकपा ने की निंदा।

मजदूरों और कर्मचारियों के लिए खज़ाना ख़ाली लेक़िन अपने लिए लुटा रही है सरकार —
टिहरा( मण्डी) —
हिमाचल सरकार ने विधायकों के लिए होटलों में ठहरने के लिए साढ़े सात हज़ार रुपये की सीमा समाप्त कर दी है और अब वे अनपे मनचाहे होटलों में रह सकते हैं और जो वास्तविक ख़र्च होगा उसे सरकार वहन करेगी।इसी प्रकार सालाना खर्च के लिए भी लिमिट अढ़ाई लाख रुपये से बढ़ा कर चार लाख रुपए सालाना कर दी है।इस बृद्धि की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता भूपेंद्र सिंह ने विरोध किया है।उन्होंने बताया कि तरफ़ जहाँ पर हिमाचल सरकार ने 65 हज़ार करोड़ रुपये का ऋण लेकर अपना खर्चा चलाया हुआ है ।सरकारी कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन योजना लागू करने से सरकार इंकार कर रही है और ऑउटसोर्स मजदूरों के लिए नीति नहीं बना रहे हैं।सरकार की आमदनी कम है और ख़र्चा ज्यादा है और घाटे का बजट मुख्यमंत्री ने पेश किया है तो ऐसी स्थिति में अपने लिए सैर सपाटे के लिए की गई बृद्धि किसी भी सूरत में सही नहीं है।मुख्यमंत्री हेलीकॉटर के बिना टूअर नहीं करते हैं और मंत्रियों के लिए महंगी महंगी गाड़ियां पहले ही ख़रीदी गई हैं।यही नहीं कुछ मंत्रियों को तो चार चार गाड़िया दी गई हैं जिनमें उनके परिवार के सदस्य ही घूमते रहते हैं।इससे पता चलता है कि भाजपा की सरकार अपने विधायकों के लिए फिजूलखर्ची कर रही है।सरकार ने शुरू में ही विधायकों और मंत्रियों का वेतन बढ़ा दिया था और अपने लिए पेंशन योजना भी जारी रखी हुई है।लेकिन कर्मचारियों की पेंशन शुरू करने में आना कानी की जा रही है।सरकारी महकमों में कम वेतन पर मज़दूर भर्ती किये जा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी में एक रुपया वृद्धि नहीं कि है लेकिन अपने लिए ये सब कर दिया जो सही निर्णय नहीं है।इसलिए सरकार को अपने बजाये मजदूरों, कर्मचारियों और आम लोगों को राहत देनी चाहिए।