पूर्व मंत्री अनिल शर्मा के राजनीतिक करियर पर पूरी तरह कर्फ्यू लग चुका है। हालांकि वह अभी तक भाजपा विधायक हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव के

दौरान उनके पिता और पुत्र के राजनीतिक ड्रामे ने अनिल शर्मा के राजनीतिक करियर पर पानी फेर दिया। अनिल शर्मा के पिता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम ने पोते आश्रय शर्मा को कांग्रेस से चुनाव लड़वाने का राजनीतिक ड्रामा रख दिया और

लाखों मतों से हार देखने को मिली, जिसका सीधा असर अनिल शर्मा की राजनीति पर पड़ चुका है। पिछले दिनों मंडी में अनिल शर्मा राजनीतिक पारी के बहाने

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का स्वागत भी कर गए, लेकिन मंच पर उन्हें भाजपा ने पूरी तरह इग्नोर कर दिया। यहीं से साबित हो गया कि अब अनिल शर्मा के लिए

भाजपा में कोई जगह नहीं हैं। दूसरी तरफ अनिल शर्मा चाह कर भी कांग्रेस में शामिल नहीं हो सकते। कारण यह है कि यदि भाजपा छोड़ कांग्रेस से हाथ मिला लेते हैं, तो उनकी विधायकी भी चली जाएगी।

Desk

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