रोहतक के डीसी ने दिए ग्रामीणों को निर्देश, हुक्का और ताश खेलने पर लगाएं पाबंदी।

सोशल मीडिया पर राहुल सुथर नाम के एक लड़के ने वीडियो अपलोड किया है जिसमें वो हुक्के का मतलब समझा रहा है- इट इज वेरी फेमस एंड ठाढ़ा इन्स्ट्रूमेंट। इट इज एन एनर्जी ड्रिंक फॉर हरियाणा पीपल। कालजे नै फाडू। कहने का मतलब है कि हुक्का सिर्फ मनोरंजन तक ही सीमित नहीं है। ये किसी की सामाजिक स्वीकार्यता की निशानी भी है। उदाहरण के लिए अगर किसी का सामाजिक बहिष्कार करना है तो उसका हुक्का-पाणी बंद कर दिया जाता है। लेकिन अब चिंता की बात ये है कि लॉकडाउन के चलते पांच-छह लोगों के एक साथ हुक्का पीने के वीडियो ज्यादा आ रहे हैं। इसलिए अब वक्त आ गया है कि हुक्के के इज्जत और शान वाले मतलब के अलावा इसे स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाए। इस बार हुक्का पाणी बंद हो तो वो किसी के सामाजिक बहिष्कार के लिए नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की भलाई और कोरोना को रोकने के लिए हो। किसान आंदोलन के धरने हो या फिर कहीं पर भी ग्रामीणों का जमावड़ा, हुक्के के साथ बैठे देखे जा रहे हैं लेकिन अब रोहतक के डीसी ने ग्रामीणों को निर्देश दे दिए है कि इन सब से दूर रहे क्योंकि ये कोरोना को बढ़ाएगा।

बता दें लॉकडाउन को लेकर जिला प्रशासन ने लोगों के लिए हिदायतें जारी की हैं। रोहतक के डीसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक एडवाइजरी जारी की और लोगों से अपील की कि बेशक कोरोना के मामले घटने से लॉकडाउन में ढील मिल रही है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। लोग लापरवाही ना बरतें और एहतियात बरतते हुए कोविड नियमों की अनुपालना करें।

जिला उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने कहा कि सरकार की तरफ से कोरोना नियमों में जो ढील दी गई है, उसकी वजह यह है कि लगातार कोरोना के केस घटते जा रहे हैं। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि इसे हम हल्के में लें। बाजार खुलने के समय में बढ़ोतरी की गई है। बाजारों में सोशल डिस्टेंसिंग की अनुपालना करें, कोरोना के मामलों में निश्चित तौर पर गिरावट आ रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं की खतरा टल गया। हमें उसी ढंग से एहतियात बरतने की आवश्यकता है, ताकि इस महामारी से निजात मिल सके। डीसी ने खासतौर से ग्रामीणों से अपील की कि गांवों के अंदर हुक्के और ताश खेलने पर पाबंदी लगाकर रखें।

इस दौरान रोहतक के एसपी राहुल शर्मा भी मौजूद रहे उन्होंने कहा कि कोरोना नियमों की अवहेलना करने वालों के चालान काटे जा रहे हैं। इस दौरान कई बार लोग पुलिस पर आरोप भी लगाते हैं और पुलिस कर्मचारी भी दुर्व्यवहार की शिकायतें करते हैं। इन सब को देखते हुए यह फैसला लिया गया है कि जितनी भी टीम वाहनों के चालान कर रही हैं, उनको बॉडी कैमरे दिए जाएंगे, ताकि इस तरह के विवादों से बचा जा सके। अगले एक-दो महीने में सभी टीमों को यह मुहैया करा दिए जाएंगे और तब तक चालान प्रक्रिया को मोबाइल से रिकॉर्ड करने के निर्देश दिए गए हैं।

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