हड़ताली कर्मचारियों का पूर्व ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने किया समर्थन – सरकार ने जल्दी मांगे नहीं मांगी तो अन्य जनसंगठन भी उतरेंगे समर्थन में।

टिहरा मण्डी) – हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज व ग्रामीण विकास विभाग में साढ़े चार हज़ार से ज़्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं।जिनमें 3226 पँचायत सचिव 1081 तकनीकी सहायक 237 कनिष्ठ अभियंता के अलावा डाटा एंट्री ऑपरेटर से लेकर अधिशासी अभियंता तक के कर्मचारी शामिल हैं। जिन्हें सरकार ने कब ज़िला परिषद केडर में तब्दील कर दिया है इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। ये तथाकथित ज़िला परिषद केडर में आने वाले सभी कर्मचारी पिछले तीन दिनों से कलम छोड़ हड़ताल पर हैं जिससे प्रदेश में सभी पँचयतों, पँचायत समितियों व विकास खंडों तथा ज़िला परिषद के दफ़्तर बन्द हो गए हैं।पूर्व जिला परिषद सदस्य व मज़दूर संगठन सीटू के मंडी ज़िला के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने कर्मचारियों हड़ताल का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को इन्हें जल्दी से जल्दी पंचायती राज या ग्रामीण विकास विभाग में शामिल करे।उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 के बाद सरकार ने इन कर्मचारियों को ज़िला परिषद केडर कहना शुरू किया जबकि इनकी नियुक्ति और वेतन सरकार के नियमानुसार हुई है लेकिन अब जब छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का मामला सामने आया तो वित्त विभाग ने इन कर्मचारियों को इस वेतन आयोग के लाभ देने के अयोग्य घोषित कर दिया।उसके बाद ही इस बात का पता चला कि ये जितने भी कर्मचारी जो तीन स्तरीय पँचायती राज संस्थाओं में कार्यरत हैं ये किसी भी विभाग के अंडर नहीं आते हैं।भूपेंद्र सिंह ने कहा कि इन कर्मचारियों को वेतन व भते राज्य सरकार अपने विभागों के जरिये जारी करती और ज़िला परिषदों को इसका कोई बजट अलग से जारी नहीं किया जाता है और न ही ज़िला स्तर पर ट्रेज़री के माध्य्म से नंम्बर जारी किया गया है।सरकार ने बड़ी चालाकी से राज्य स्तर पर ही एक नंम्बर अलॉट किया है जहां से उनका वेतन जारी किया जाता है।भूपेंद्र सिंह ने कहा कि यदि भविष्य में ओल्ड पेंशन स्कीम लागू होती है तो ये कर्मचारी उससे भी बंचित रहेंगे।उन्होंने कहा कि पंचायती राज व ग्रामीण विकास विभाग ऐसे महकमें हैं जो प्रदेश की 95 प्रतिशत जनता के विकास के साथ जुड़े हैं लेकिन उनमें काम कर रहे कर्मचारियों को किसी भी विभाग के अंतर्गत न रखना सरकार की ग्रामीण इलाकों के साथ भेदभाव करने की सोच को ही दर्शाती है।उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के मुख्यमंत्री पूर्व में पंचायतीराज व ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री भी रह चुके हैं और वे इस बात से अवगत भी होंगे तो फ़िर इन कर्मचारियों को विभागों से बाहर कियूं और कैसा किया गया यह बहुत ही निंदनीय विषय है और मुख्यमंत्री को तुरंत इस मसले को सुलझाना चाहिए।उन्होंने सरकार द्धारा हड़ताल पर गये कर्मचारियों पर सेवा सर्विस रुलज के तहत कार्यवाई करने की धमकी देने की भी निंदा की है।उन्होंने सवाल खड़े किये हैं कि एक तरफ़ सरकार इन चार हज़ार कर्मचारियों को किसी भी विभाग का कर्मचारी घोषित करने से इंकार कर रही है लेकिन दूसरी तरफ सरकारी कर्मचारियों के लिए बने सर्विस रूल इन पर लागू करके इन्हें दबाना चाहती है।जो सरकार के दोहरेपन और तानाशाही वाली प्रवृति को ही उजागर करती है।भूपेंद्र सिंह ने सरकार को चेताया है कि वे जल्दी ही इन कर्मचारियों को विभागीय कर्मचारी घोषित करे अन्यथा मजदूरों और कर्मचारियों के अन्य संगठन भी इनके साथ आंदोलन में शामिल होने के लिए तैयार हैं और सरकार को झुका कर ही रहेंगे।