सुरेंद्र ठाकुर ब्यूरो- पांगीघाटी के धरवास, आजोग और साच हेलीपैडों के लिए हवाई उड़ाने न होने के कारण लोगों को घाटी से बाहर निकलने के लिए भारी दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा।

बता दें कि पूर्थी से किलाड़ के लिए अभी भी रास्ता नहीं खोला गया है जिसके कारण पूर्थी में चार मरीज जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। देवेंद्रा कुमारी पत्नी हीरा लाल गांव पूर्थी, गीता पत्नी देवी सिंह गांव पूर्थी, जीवन सिंह सपुत्र हरी नाथ गांव छाऊ, वेबो कुमारी पत्नी देवेन्द्र कुमार गांव थांदल से है। इन सभी को चम्बा के लिए रेफर किया गया है लेकिन रास्ता न खुले होने और अजोग के लिए हवाई उड़ान न होने के कारण घर में ही फंसे हुए हैं।

लोगों का कहना है कि सरकार और जनजातीय मंत्री जान बूझ कर हवाई उड़ाने नहीं करवा रहे हैं। कभी यह दलील दी जाती हैं कि हेलीपैड उड़ान भरने योग्य नहीं है। कोई न कोई बहाना बनाकर इन हेलीपैडों में उड़ाने नहीं करवाई जा रही है। पूर्व जनजातीय सलाहकार परिषद के मेम्बर कैलाश ठाकुर, पूर्ण चन्द किशन चोपड़ा पूर्व पंचायत समिति उपाध्यक्ष नील चन्द ठाकुर, सुभाष चौहान, देसराज शर्मा का कहना है जब से भाजपा ने सत्ता संभाली हैं तब से घाटी में तमाम विकास कार्य

ठप हो गए हैं। गतबर्ष सरकार ने गिनी चुनी फ्लाइट करवाई गई । उन्होंने कहा इस बर्ष किलाड़ के लिए भी सप्ताहिक उड़ानों का शेडयूल है लेकिन माह में एक उड़ान करवाई जा रही है। उन्होंने कहा यहां तो मरीजो को भी हेलीपैड से वापिस जाना पड़ रहा है। रविवार को भी तीन ही मरीज चंबा और भून्तर के लिए जा पाए। सरकार के अनुबन्ध के मुताबिक 20 लोग जाना चाहिए लेकिन 15 -16 ही लिये जाते हैं। इससे एक बात साफ है कि सरकार पांगीघाटी के लोगो के साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि घाटी में चारो हेलीपैडों के लिए उड़ाने करवाई जाए साथ मे 20 लोगो को ले जाने की व्यवस्था की जाए।

पांगीघाटी मुख्यालय किलाड़ के लिये रविवार को उड़ाने करवाई गई। साच आजोग औऱ धरवास के लिए हवाई उड़ानो के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द सरकार इन हेलीपैडों के लिए उड़ाने निर्धारित करेगी यह कहना है सुखदेव सिंह राणा आवासीयआयुक्त पांगी का।

साच हेलीपैड से साच, कुमार, साहली, शून औऱ सैचुनाला आता है।
धरवास हेलीपैड से धरवास, लुज और सुराल, आजोग हेलीपैड से पुरथी, मिन्धल और रेई पंचायतो के लोगों को घाटी से बाहर निकलने का मौका मिलता है। वहीं मरीजों को भी किलाड़ आने की जरूरत नहीं रहती। लेकिन अफसोस साच, धरवास

और अजोग के हेलीपैडों को ही बंद करवा दिया गया है। लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि इसकी शिकायत करें तो किससे। पांगी घाटी के लोगों को सिर्फ वोट बैंक तक सीमित रखा है वहाँ की जनता किन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं यह सरकार को नहीं दिखाई दे रहा है।

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