जलशक्ति मन्त्री ठाकुर महेन्द्र सिंह जी की शिक्षकों के प्रति टिप्पणी पर हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद् का मन्त्री जी को जबाब।

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[metaslider id=8121] ब्यूरो प्रमुख बिलासपुर (विक्रांत शर्मा ) हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद् ने प्रदेश सरकार के जल शक्ति मन्त्री श्री महेन्द्र सिंह ठाकुर के शिक्षकों के प्रति की गई टिप्पणी की निन्दा की है। परिषद् के प्रदेशाध्यक्ष डॉ मनोज शैल, महासचिव डॉ अमित शर्मा, कोषाध्यक्ष श्री सोहनलाल, संरक्षक डॉ अरुण शर्मा, डॉ दुनीचन्द शर्मा,

संगठन मंत्री डॉ योगेश अत्रि, प्रवक्ता शान्ता कुमार, सचिव ललित शर्मा, धारो राम, शेर सिंह, आई टी सचिव डॉ विवेक शर्मा, आई टी संयोजक डॉ अमनदीप शर्मा, चम्बा से अमर सेन व हेम सिंह, कांगड़ा से राजकुमार व गिरिराज, ऊना से बलवीर चन्द व डॉ शिवकुमार, हमीरपुर से रजनीश व डॉ विपिन शर्मा, बिलासपुर से राजेन्द्र व भूप राम, मण्डी से राजेश कुमार व बलवंत शर्मा, शिमला से दिग्विजयेन्द्र व

श्याम मानसागर, सिरमौर से रामपाल अत्रि व राधेश्याम, सोलन से दुर्गानन्द, कमलकान्त गौतम व अनमोल, किन्नौर से बांगछेन राहुल तथा जंगछुब नेगी ने संयुक्त रूप से विचार-विमर्श कर निर्णय लिया कि यह टिप्पणी शिक्षकों को अपमान है। परिषद के प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि माननीय मन्त्री जी आप कहते हैं केवल जलशक्ति विभाग व लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों ने मेहनत की है बाकियों ने इस काल में मजे किये हैं और शिक्षकों ने तो खूब मजे किये हैं पता नहीं ये कैसे फ्रंटलाइन वर्कर बन गये ?

माननीय मंत्री जी शिक्षक ऐसे ही फ्रंटलाइन वर्कर नहीं हैं शिक्षकों ने सरकार के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर प्रत्येक चुनोती में साथ दिया है चाहे ऑनलाइन पढ़ाई हो, चाहे कोरोना सेन्टर में ड्यूटी हो, चाहे वार्डरों पर ड्यूटी हो, चाहे घर-घर जाकर चावल बाँटने का कार्य हो, चाहे शिक्षा विभाग को प्रत्येक तरह की डाक बनाकर भेजने की बात हो, वेक्सीनेशन सेंटर पर तैनाती हो , कोविड पास बनाने में ड्यूटी हो सब जगह शिक्षक डटे रहे और आप कहते हैं कि शिक्षकों ने कोरोना काल में मजे किए हैं? आपको बता दें शिक्षक सदैव अपने छात्रों में ही प्रसन्न रहता है, उसने इस समय में जिस तरह के मानसिक तनाव को झेला है, वह वही जानता है।

शिक्षा विभाग का हर घर पाठशाला कार्यक्रम जो पूरे देश में आज अलग पहचान बना चुका है । इस कोविड काल यह श्रेय शिक्षकों को ही जाता है। शिक्षकों ने अपने संसाधनों से प्रत्येक कक्षा के हर विषय की पाठ्य-सामग्री का निर्माण कर हर घर पाठशाला के माध्यम से पूरे प्रदेश में पहुंचाया है ऐसे में आज तक आपसे व सरकार से प्रोत्साहन का एक शब्द तक नहीं निकला कभी सरकार ने ये नहीं सोचा कि हम इन शिक्षकों से बात भी कर लेते हैं वे किस प्रकार इस कार्य को कर रहे हैं बल्कि इस तरह की टिप्पणी कर पूरे शिक्षक समाज का अपमान किया है। ये वही शिक्षक हैं जो दिन में कोविड की ड्यूटी देते हैं और रात को जाग-जागकर पाठ्य-सामग्री की वीडियो बनाकर उसकी रिकार्डिंग कर शिक्षा विभाग को देते हैं। कभी आपने उनके बारे में सोचा ?

हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद् माननीय मुख्यमंत्री जी से आग्रह करती है कि मन्त्रियों के ऐसे ब्यान पर अंकुश लगाया जाए और शिक्षकों के सम्मान को जो ठेस पहुंची है उसके लिए मंत्री जी उनसे क्षमा मांगे।

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