मंडी में माता और पुत्र को अति उत्साहित भावनात्मक प्रचार पड़ सकता है महंगा।

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प्रदेश में कांग्रेस पार्टी को जिला मंडी में अति उत्साहित चुनाव प्रचार महंगा साबित पड़ सकता है। और इसकी वजह यह भी है कि एक तरफ तो हिमाचल प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने साफ तौर पर कह दिया है कि वह जिला मंडी में लोकसभा चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के विकास कार्यों को लेकर वोट मांगेगी परन्तु जिला मंडी की उम्मीदवार पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह अपने पति पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि देने के नाम पर वोट मांग रही है। इस तरह का चुनाव प्रचार जनता में क्या संदेश दे रहा है, इसका जवाब तो परिणाम आने के बाद ही पता चल पाएगा, लेकिन भाजपा ने जिला मंडी में इस तरह के चुनाव प्रचार को लेकर लोगों के सामने अपनी बात रखी है।

वहीं, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और जिला मंडी लोकसभा के उम्मीदवार ब्रिगेडियर खुशाल सिंह ठाकुर ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी भावनात्मक पहलू को भुनाना चाहती है, लेकिन हिमाचल प्रदेश की जनता अपने पूर्व नेताओं का सम्मान करती है और वह उसी उम्मीदवार को अपना मत देगी जो हिमाचल प्रदेश के विकास और सम्मान के लिए आगे आएंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हिमाचल प्रदेश कांग्रेस नेताओं में प्रचार के दौरान यह बात सार्वजनिक होने लगी है कि तीन विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर होने वाले चुनाव में स्थानीय नेताओं की भागीदारी को दरकिनार कर स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारा जा रहा है, जिनमें मुख्य तौर पर विवादित नेताओं जिसमें पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और हाल ही में सीपीएम से आए कन्हैया कुमार को प्रचार में उतारा जा रहा है। इन नेताओं को लेकर खासकर युवाओं में यह संदेश पहुंच रहा है कि हिमाचल प्रदेश में नेताओं का प्रदेश स्तर पर कितना जनाधार है, अब इस पर सवाल खड़े हो गए हैं।

भले ही राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर दूसरे प्रदेशों से नेताओं को प्रदेश में प्रचार के लिए उतारा है, लेकिन हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक राजनीतिक और सामाजिक परिवेश अन्य राज्यों से अलग है, यहां पर लोग अति उत्साहित नेताओं के भाषणों पर ज्यादा तवज्जो नहीं देते हैं। जहां तक उपचुनावों की बात है तो बीते समय में हुए उपचुनावों में यह जरूरी नहीं कि वर्तमान सरकार के नुमाइंदे ही जीत हासिल करें। इसके साथ साथ यह भी तय है कि हिमाचल कांग्रेस में इस बार के उपचुनाव यह तय कर देंगे कि कौन सा नेता किस स्तर पर स्थापित होगा। नेताओं की आपसी खींचातानी सामने आ रही है, जैसे-जैसे चुनाव जोर पकड़ता जा रहा है।

उधर भाजपा नेताओं ने इन उपचुनावों व लोकसभा के सीट पर होने वाले चुनाव में डेमेज कंट्रोल को काफी हद तक हल किया है, लेकिन कोटखाई जुब्बल विधानसभा क्षेत्र में मुकाबला कड़ा रहने की उम्मीद है। जहां तक अर्की विधानसभा क्षेत्र का सवाल है, वहां के समीकरण भाजपा के पक्ष में ही बनते दिख रहे हैं। अभी चुनावों में समय है, बावजूद इसके भाजपा का उम्मीदवार सशक्त बताया जा रहा है।

फतेहपुर में भी कांग्रेसी इस सीट पर अपना दावा जता रहे हैं, लेकिन उनके लिए भी राह आसान नहीं है। बहरहाल जो भी है अभी चुनाव के कई रंग जनता को देखने में मिलेंगे।

 

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