सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने मंगलवार को केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में आयोजित ग्रामीण पेयजल आपूर्ति और जल संसाधन संरक्षण के राष्ट्र स्तरीय सम्मेलन में भाग लिया।

सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री ने केन्द्र को हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के अंतर्गत मिलने वाली निधि में 25 प्रतिशत की कटौती के बारे में अवगत करवाया तथा केन्द्र से कार्यक्रम के

अंतर्गत राज्य को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी) के अंतर्गत 2014-15 में 99 परियोजनाएं प्रस्तावित थी तथा जिनमें से एक भी परियोजना हिमाचल को नहीं मिली। उन्होंने सम्मेलन में यह भी जानकारी दी कि हिमाचल की पांच डीपीआर केन्द्र सरकार के पास लम्बित है।

उन्होंने बताया कि पहाड़ी राज्यों के लिए मापदण्डों छूट दी जानी चाहिए तथा पहाड़ी राज्यों को अन्य राज्यों की पस्थितियों के समान नहीं आंकना चाहिए जहां परियोजनाओं की निष्पादन लागत कम है। उन्होंने वन संरक्षण अधिनियम, 1980 (एफसीए) के कारण होने वाली अनावश्यक देरी के बारे में भी अवगत कराया क्योंकि राज्य में अधिकांश वन भूमि है और स्वीकृति की जटिल प्रक्रिया परियोजनाओं को लागू करने में बाधक सिद्ध हो रहे है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल ने देश हित की विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं के लिए अपना अमूल्य योजना दिया है और राज्य के नई हितों की अनदेखी हुई है, में चाहे वह बीबीएमबी में बिजली में हिस्सेदारी हो या पौंग बांध विस्थापितों को मुआवजे का मामला हो। उन्होंने कहा कि राज्य राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और चंड़ीगढ़ को जल उपलब्ध करवा रहा है। उन्होंने केन्द्र से राज्य के हितों की रक्षा करने और प्रदेश को उसका उचित हिस्सा प्रदान करने आग्रह किया।

सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री ने परियोजनाओं की बेहतर निगरानी और कार्यन्वयन के लिए राष्ट्रीय जल आपूर्ति और सिंचाई प्राधिकरण के गठन का भी सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि हिमाचल मध्यम और कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जल संचयन और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिम संचयन के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है जिससे जल संरक्षण में मदद मिलेगी। उन्होंने केन्द्र सरकार से इन परियोजनाओं के लिए समर्थन मांगा जिससे राज्य जल संरक्षण में अहम भूमिका निभा सके।

उन्होंने कहा कि हिमाचल जल संरक्षण के बारे में गंभीर है तथा हिमाचल सरकार स्कूलों के माध्यम से समाज के सभी वर्गों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए प्रयासरत है।

सम्मेलन के दौरान मंत्री के साथ सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य सचिव आर.एन बत्ता भी उपस्थित थे।

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