BJP में कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं!, सियासी गलियारों में उठ रहे सवाल?

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[metaslider id=8121]उत्तराखंड में सियासी हलचलों और अटकलों का नया दौर शुरु हो गया है। कयास लगाए जा रहें हैं कि उत्तराखंड की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है। हालांकि इसमें अंतिम फैसला बीजेपी आलाकमान को लेना है लेकिन जिस तरह के हालात हैं उससे लग रहा है कि कुछ तो गड़बड़ है।

दरअसल इन सियासी हलचलों और अटकलों के पीछे जो सबसे बड़ी वजह है वो है सीएम तीरथ सिंह रावत का दिल्ली दौरा। सीएम तीरथ सिंह रावत को अचानक ही पार्टी आलाकमान ने दिल्ली तलब कर लिया। जबकि वो रामनगर में तीन दिन तक चिंतन शिविर में शामिल होकर देहरादून लौटे थे। इसी बीच उन्हें पार्टी ने दिल्ली बुला लिया। पहले ये माना जा रहा था कि बुधवार को सीएम तीरथ सिंह रावत और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मुलाकात हो सकती है। लेकिन हैरानी इस बात की रही कि बुधवार को दोनों नेताओं की मीटिंग नहीं हो पाई। इसके बाद गुरुवार को दोनों के बीच बैठक की संभावना जताई गई।

तीन विकल्पों पर चर्चा

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को यूं अचानक दिल्ली बुलाए जाने को लेकर कयासबाजियों का दौर देहरादून में शुरु हो गया। सियासी अड्डेबाजियों में तीन विकल्पों को लेकर चर्चाएं हो रहीं हैं। पहली है उपचुनाव कराना। दूसरी है विधानसभा भंग करना और तीसरा विकल्प है मुख्यमंत्री बदलना।

हालांकि सियासी गुणाभाग के आधार पर देखें तो बीजेपी के लिए ये तीनों ही विकल्प खतरे से भरपूर भरे हुए हैं। बीजेपी ने अपने अपार बहुमत की सरकार चार साल चलाने के बाद मुख्यमंत्री बदलने का खतरे से भरा फैसला कर अपने खतरे अब और बढ़ा लिए लगते हैं। फिलहाल चर्चाओं में चल रहे विकल्पों को देखें तो बीजेपी उपचुनाव में जाती है तो उसे पश्चिम बंगाल में अपने ‘खेला’ में ‘सेल्फ गोल’ का रिस्क उठाना पड़ सकता है। जी, सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन उत्तराखंड की सियासत और पश्चिम बंगाल की राजनीति में कनेक्शन जुड़ गया है। दरअसल चुनाव आयोग ने उपचुनावों पर कोविड के मद्देनजर रोक लगा रखी है। देश भर में अलग अलग कई सीटों पर उपचुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश में भी कई विधायकों की मौत कोविड से हुई है। वहां भी उपचुनाव कराए जा सकते हैं। लेकिन सबसे बड़ा पेंच पश्चिम बंगाल में उपचुनाव को लेकर है।

‘खेला’ में होगी गड़ब़ड़

दरअसल उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की ही तरह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी विधानसभा की सदस्य नहीं हैं। ममता बनर्जी ने चुनाव जरूर लड़ा लेकिन नंदीग्राम से वो हार गईं लेकिन संयोग देखिए कि उनकी पार्टी सत्ता में वापसी कर गई। ऐसे में ममता बनर्जी सीएम तो बन गईं लेकिन अभी उन्हें उपचुनाव जीतकर विधानसभा का सदस्य बनना है। चूंकि फिलहाल उपचुनाव हो नहीं रहें हैं लिहाजा बीजेपी इसे एक मौके के तौर पर देख रही है। सियासी जानकार मानते हैं कि वेस्ट बंगाल में बीजेपी कोई बड़ा ‘खेला’ कर सकती है और सत्ता में आने के लिए ऐन केन प्रकारेण कोशिश कर सकती है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि ममता को विधानसभा का सदस्य बनने से रोका जाए। और ये तभी संभव है जब उपचुनाव पर रोक बनी रहे।

लेकिन बीजेपी की ये रणनीति उसके लिए ही उत्तराखंड में आत्मघाती साबित हो रही है। दरअसल यहां भी मुख्यमंत्री विधानसभा के सदस्य नहीं हैं। लिहाजा उन्हें भी शपथ ग्रहण करने के छह महीनों के भीतर विधानसभा का सदस्य बनना है। ये तारीख 10 सितंबर है। अब अगर आयोग उत्तराखंड में उपचुनाव की हरी झंडी देता है तो जाहिर है कि अन्य राज्यों में भी उपचुनाव को हरी झंडी मिल जाएगी। ऐसे में वेस्ट बंगाल में बीजेपी का खेल बिगड़ सकता है।

कलंक अच्छा नहीं

अब विधानसभा भंग कर उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने का विकल्प देखिए। ये फैसला बेहद संवेदनशील है और मौजूदा वक्त में बीजेपी ऐसा नहीं करना चाहेगी। बीजेपी के राज्य में बहुमत से कहीं अधिक विधायक हैं और संवैधानिक रूप से भी ये गलत परंपरा होगी। फिर इससे विपक्षी पार्टियों को मौका मिलेगा और जनता में गलत संदेश जाएगा। लिहाजा बीजेपी अपने माथे पर ये कलंक नहीं लेना चाहेगी।

अब बचता है तीसरा और अंतिम विकल्प और वो है मुख्यमंत्री का बदला जाना। बीजेपी अगर ‘कैलकुलेटेड रिस्क’ के लिहाज से काम कर रही है तो मुख्यमंत्री का बदलना रिस्क फैक्टर के सारे मीटर तोड़ सकता है। बीजेपी ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाने के घटनाक्रम से पहले ही राज्य की जनता को हैरान कर रखा है। बीजेपी की दी ये हैरानी तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाने से नाराजगी में बहुत अधिक तब्दील नहीं हो पाई लेकिन अब अगर तीरथ सिंह रावत को भी बदला जाता है और विधायकों में से किसी को मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो वो उस विधायक और बीजेपी दोनों के लिए घाटे का सौदा हो सकता है। फिर विधायकों में भी फूट पड़ने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि बदले हालात में बीजेपी में भी खेमेबाजी हो चुकी है।

कुछ तो है…

फिलहाल तमाम हालातों और बयानों के मद्देनजर ये तो साफ है कि बीजेपी में कुछ तो गड़बड़ चल रहा है। बीजेपी किसी बड़े ‘खेल’ की तैयारी में है। फिर मुख्यमंत्री के बाद अचानक राज्य के दो और नेताओं को दिल्ली बुलाया जाना भी इस खेल में कुछ बड़ा होने की तस्दीक कर रहा है। बताया जा रहा है कि सतपाल महाराज दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं औऱ हाईकमान उत्तराखंड के कई मंत्री-विधायकों के साथ सम्पर्क साधे हुए है।

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