Moti Nagar Theft: CCTV पर किया स्प्रे.. एटीएम को कटर से काटा और उड़ा लिए लाखों

दिल्ली में लाखों की चोरी का हैरतअंगेज मामला सामने आया है, जहां चोरों के एक समूह ने एटीएम कियोस्क से 5 लाख रुपये की नकदी उड़ा ली है. हालांकि अबतक उनकी पहचान नहीं हो पाई है, मगर बताया जा रहा है कि, चोरी की इस वारदात को अंजाम देने से पहले चोरों ने क्लोज-सर्किट टेलीविजन यानि सीसीटीवी कैमरे पर काला पेंट छिड़क कर उसे डिसेबल कर दिया. इसके बाद एक गैस कटर से, उन्होंने एटीएम कियोस्क को काट डाला और अंदर मौजूद कैश वॉल्ट को लूट कर फरार हो गए.

शुक्रवार रात, मोती नगर के सुदर्शन पार्क एचडीएफसी से पुलिस को कॉल रिसीव हुई, बताया गया कि मैके पर एक एटीएम कियोस्क में लाखों की चोरी को अंजाम दिया गया है. इसके बाद, मोती नगर पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 457 और 380 के तहत मामला दर्ज किया गया है. हालांकि पुलिस मामले में आगे की तफ्तीश में जुटी हुई है.

गौरतलब है कि, चोरी की ये वारदात तब हुई, जब अभी एक हफ्ते पहले ही दिल्ली पुलिस ने लगातार हो रही एटीएम डकैतियों के जिम्मेदार एक कुख्यात गिरोह के पांच सदस्यों को दबोचा था. इन मामलों में सराय रोहिल्ला पुलिस स्टेशन क्षेत्र में एक एटीएम कियोस्क भी शामिल था, जहां लगभग ₹15 लाख की चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया था.

पुलिस के अनुसार, आज़ाद नामक मास्टरमाइंड के नेतृत्व वाले इस आपराधिक सिंडिकेट की कार्यप्रणाली उन्हें सामान्य एटीएम चोरों से अलग करती है. अधिकारियों ने खुलासा किया कि गिरोह के सदस्य इतनी चालाकी से काम करते थे, जो ऐसी आपराधिक गतिविधियों में शायद ही कभी देखा जाता हो.

दिल्ली पुलिस उपायुक्त (उत्तर) सागर सिंह कलसी ने मामले में अतिरिक्त जानकारी देते हुए बताया कि, वारदाश में शुमार इस गिरोह के पास एक अद्वितीय कार्यप्रणाली है. कार चुराने से पहले वे ऑटोमैटिक और पुश-स्टार्ट लग्जरी कारों में लगे सुरक्षा सिस्टम को खत्म कर देते थे. गिरोह के सदस्यों ने एक कार की पहचान की और उसकी पिछली विंडस्क्रीन पर चिपकाए गए होलोग्राम की तस्वीरें लीं, जिसमें वाहन में स्थापित सुरक्षा प्रणाली का अद्वितीय कोड था. फोटो दुबई स्थित गिरोह के तकनीकी विशेषज्ञ को भेजा जाता है. विशेषज्ञ ने सुरक्षा प्रणाली को अनलॉक किया, एक नया कोड तैयार किया और उसे वापस भेज दिया जाता है.

उन्होंने बताया कि, गिरोह के सदस्य कार की खिड़की का शीशा तोड़ देते थे और वाहन को चालू करने और उसमें भाग जाने के लिए नए सुरक्षा कोड वाली मशीन का इस्तेमाल करते हैं. इस मामले में कार की चोरी के बाद, गिरोह के सदस्यों ने पुलिस को गुमराह करने की मंशा से  एटीएम डकैतियों को अंजाम देने के लिए बड़ी संख्या में अन्य कारों की नंबर प्लेटें भी चुरा लीं, ताकि उन्हें चोरी के वाहन पर इस्तेमाल किया जा सके.