बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए एनएचआरसी ने जारी की परामर्शी।

हमीरपुर 08 जून। उपायुक्त देबश्वेता बनिक ने बताया कि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कोविड-19 महामारी के संदर्भ में बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए एक परामर्शी जारी की है। इसे बच्चों पर महामारी के निरंतर प्रभाव और महामारी की तीसरी लहर के बारे मे विशेषज्ञों की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए जारी किया है। परामर्शी 2.0 श्रृंखला के रूप में यह पांचवी परामर्शी है जिसे आयोग ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर जारी किया है।

आयोग ने अपने महासचिव, बिंबाधर प्रधान के माध्यम से महिला और बाल विकास मंत्रालय, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, खाद्य एवं वितरण विभाग के सचिवों, राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को लिखे पत्र में परामर्शी में उल्लेखित अपनी संस्तुतियों को लागू करने के लिए कहा है और चार सप्ताह के भीतर इस पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। विभिन्न प्राधिकरणों की रिपोर्ट में महामारी से उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनजर बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए किए गए विशिष्ट उपायों को शामिल करना अपेक्षित है। परामर्शी में कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल देखभाल संस्थानों और अनाथ बच्चों के चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है।

आयोग ने अपनी संस्तुतियों में बाल चिकित्सा कोविड अस्पतालों और प्रोटोकॉल को मजबूत करने, सभी अस्पतालों को चाइल्डलाइन (1098), स्थानीय बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू), स्थानीय पुलिस, आदि की संपर्क जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि केंद्र और राज्य स्तर पर मंत्रालयों और विभागों को भी अपनी वेबसाइट पर तुरंत और प्रमुखता से कोविड से संबंधित एक पेज स्थापित करना चाहिए।
जिलाधिकारियों को माता-पिता की मृत्यु के 4-6 सप्ताह के भीतर मौजूदा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और नीतियों से जोडक़र उन परिवारों को आर्थिक रूप से समर्थन देने के लिए कदम उठाने हैं, जिन्होंने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया है। इसमें प्रधानमंत्री द्वारा ‘पीएम- केयर्स फॉर चिल्ड्रेन’ योजना के तहत घोषित लाभों में तेजी लानें के लिए कदम शामिल होने चाहिए।

आयोग ने कोविड महामारी के दौरान बच्चों को मनोवैज्ञानिक सहायता के लिए 1800-121-2830 पर उपलब्ध टोल-फ्री टेलीफोन परामर्श सेवा संवेदना के बारे में जानकारी का प्रसार करने, कोविड-19 के लिए परीक्षण किए गए बच्चों की विभिन्न श्रेणियों के बारे में आधिकारिक वेबसाइट पर अलग-अलग डेटा बनाए रखने और बाल चिकित्सा कोविड देखभाल सुविधाओं को मजबूत करने के लिए विशेष कदम उठाने की बात कही है। सभी बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा तक पहुंच के लिए डिजिटल सुविधाओं के सार्वभौमिकरण और इस उद्देश्य के लिए विशेष रूप से पर्याप्त बजट के आवंटन जैसे मुद्दों को भी परामर्शी में शामिल किया गया है।

महामारी के कारण बाल श्रम, बाल विवाह या तस्करी और स्कूल छोडऩे जैसी समस्याओं को रोकने, बाल देखभाल संस्थानों में सभी आवश्यक सुविधाओं के प्रावधान, बाल कल्याण समितियां और किशोर न्याय बोर्ड की कार्यवाही के डिजिटाइजेशन के साथ-साथ बच्चों से संबंधित सभी संस्थानों एवं संस्थाओं के अधिकारियों-कर्मचारियों की वैक्सीनेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी एनएचआरसी ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने कहा है कि जिन बच्चों ने कोविड महामारी के दौरान अपने माता-पिता को खो दिया है, उनके लिए राज्य सरकार के समन्वय से बच्चों के लिए नोडल विभाग को प्रायोजन और पालन-पोषण संबंधी देखभाल को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए।
उपायुक्त ने बताया कि आयोग की संस्तुतियों को जिला हमीरपुर में लागू करने के लिए सभी संबंधित विभागों को आदेश जारी कर दिए गए हैं।

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