हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण (एचपीएसडीएमए) ने आज राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सहयोग से भूकम्प मैगा-मॉक का अभ्यास किया, जिसमें प्रदेश के सभी 12 जिलों ने भाग लिया। इस अभ्यास के लिए यह परिदृश्य बनाया गया कि प्रदेश में रात के समय रिक्टर पैमाने पर 8 मैगनिट्यूड का भूकम्प आया है, जिसका केन्द्र मण्डी जिला का सुन्दरनगर होगा।
प्रधान सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबन्धन ओंकार शर्मा ने कहा कि भूकम्प को इसलिए चुना गया, क्योंकि राज्य भूकम्प के जोन चार और जोन पांच के अन्तर्गत आता है तथा इस कारण राज्य के लिए यह प्रमुख खतरा है। उन्होंने कहा कि इस परिदृश्य का विकास एनडीएमए, आईआईटी मुम्बई और मद्रास के तकनीकी सहयोग से किया गया। उन्होंने कहा कि भूकम्प के कारण अन्य कई दूसरी आपदाएं जैसे भू-स्खलन, भवनों एवं पुलों का गिरना, आग, बांध विफलता और चट्टानों का गिरना आदि हो सकती हैं।  
उन्होंने कहा कि इस अभ्यास के दृष्टिगत 3 जुलाई को मुख्य सचिव बी.के. अग्रवाल की अध्यक्षता में अनुकूलन सहयोग सम्मेलन आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि 10 जुलाई को टेबल टॉप अभ्यास आयोजित किया गया था, जिसमें राज्य, जिला, सेना, वायु सेना, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, बीआरओ, सीआईएसएफ और एसएसबी के लगभग 460 अधिकारियों ने भाग लिया। आज मॉक अभ्यास प्रातः 8ः30 बजे ट्रिगर किया गया और राज्य एवं जिला आपातकाल अभियान केन्द्रों (ईओसीज) को तुरन्त सक्रिय किया गया और इंसिडेंट रिसपॉन्स टीमें (आईआरटी) अपने-अपने ईओसीज पर पहुंची।
ओंकार शर्मा ने कहा कि जिलावार परिस्थितियां एसडीएमए द्वारा दी गई और जिलों को 112 घटना स्थल दिए गए थे और इस अभ्यास में 2650 अधिकारियों के साथ 32 गैर सरकारी संगठनों के 833 स्वयं सेवकां ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास के दौरान आए काल्पनिक भूकम्प में मोबाइल एवं लैंड-लाइन सुविधा बाधित होने की स्थिति को मानते हुए आज 836 वायरलैस सेट और 62 आई-सेट फोन प्रयोग में लाए गए। उन्होंने कहा कि अभ्यास के दौरान विभिन्न गतिविधियां जैसे बचाव एवं राहत, प्रभावितों को परिवहन सुविधा, राहत शिविरों का प्रबन्ध, यातायात नियंतरण, कानून व्यवस्था, मॉक सन्देशों के रूप में एसईओसी को स्थिति की जानकारी, राज्य मुख्यालय से आवश्यक सहायता के सम्बन्ध में प्रोजेक्शन, हवाई अड्डों और चिन्हित हैलीबेसिज़ का एक्टिवेशन, क्षति एवं हानि मूल्यांकन प्रक्रिया की कार्रवाई की गई।
उन्होंने कहा कि मैगा मॉक अभ्यास का उद्देश्य राज्य, जिला और आपदा प्रबंधन विभाग की योजनाओं की प्रतिक्रिया योजना की दक्षता व समीक्षा करना है ताकि इससे आपातकाल प्रतिक्रिया योजना और जिले की संचालन प्रक्रियाओं का मूल्यांकन किया जा सके और हिस्सेदारों की जिम्मेदारे व कर्तव्य को उजागर किया जा सके ताकि हिस्सेदारो के मध्य समन्वय को बढ़ावा दिया जा सके और आम जनता में जागरूकता लाई जा सके और कमजोरियों को चिन्हित किया जा सके।
वरिष्ठ परमर्शदाता, राष्ट्रीय प्राधिकरण (एनडीआरएफ), मेजर जनरल (सेवानिवृत) वी.के. नाइक ने इस मॉक अभ्यास के दौरान विभिन्न एजेंसियों, एसइओसी और डीइओसी की कार्यप्रणाली का परीक्षण किया तथा पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों द्वारा प्रयोग में लाए गए संचार नेटवर्क की कम्पैटिबिल्टि की भी जॉंच की। उन्होंने कहा कि मॉक अभ्यास का संचालन एनडीएमए द्वारा विकसित इंसिडेंट रिसपॉन्स सिस्टम (आईआरएस) के अनुसार संचालित की गई, जिसमें और अधिक सुधार किए जाएंगे।
निदेशक व विशेष सचिव राजस्व व आपदा प्रबन्धन डी.सी राणा ने कहा कि हमें पिछली घटनाओं से व आज के अभ्यास को व्यावहारिक रूप से लागू करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एसडीएमए द्वारा राज्य में आपदा प्रबंधन के लिए उपकरण व विशेष औजार खरीदने के लिए धनराशि उपलब्ध करवाई गई है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग को 8.16 करोड़ रुपये, पुलिस को पुलिस आपदा प्रतिक्रिया संचार योजना के लिए 4.28 करोड़ रुपये, गृह रक्षा विभाग को 14 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए गए है। उन्होंने कहा कि इस पर कुल 26.78 करोड़ रुपये व्यय किए गए है।
उन्होंने कहा कि राज्य में संचार प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए पुलिस और एसडीएमए ने 62 आई-सैट फोन खरीदे है तथा लाहौल-स्पीति को 8 अधिक आई-सैट फोन शीघ्र ही उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त पुलिस विभाग के लिए 75 वी-सैट फोन स्वीकृत किए गए है। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास के दौरान हैलीकॉप्टर उडान भरने के लिए तैयार था लेकिन खराब मौसम के चलते नहीं उड़ सका।
पुलिस अभ्यास के महानिरीक्षक हिमांशु मिश्रा ने बताया कि पुलिस ने धर्मशाला, मण्डी और शिमला में तीन मोबाईल संचार वैन उलब्ध करवाई है जिनमें संचालक के साथ सैटेलाईट फोन, वायरलैस संचार और वीएचएफ भी उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त वायरलैस सैट, आई-सैट भी इस्तेमाल किए गए।
बाद में डीब्रीफींग भी की गई जिसमें ओंकार शर्मा, वी.के नायक, सेना और अर्धसेना बल के अफसरों ने उपायुक्तों से विडियो कांफ्रेसिंग द्वारा बातचीत की। ओंकार शर्मा ने कहा कि आज कि मैगा मॉक अभ्यास गत वर्ष फरवरी में आयोजित मॉक ड्रिल की तुलना में काफी संतोषजनक रहा। उन्होंने कहा कि इससे हमें अपनी ताकतें और कमज़ोरियां आंकने में सहायता मिली है। उन्होंने उपायुक्तों से जिला आपदा प्रबंधन योजना को वर्तमान मौजूदा स्थिति के अनुसार स्तरोन्नत करने को कहा। उन्होंने कहा कि उप-मण्डल व जिला स्तर पर मॉक अभ्यास आयोजित करने के लिए धनराशि उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि और अधिक सैटेलाईट फोन जोड़े जाएंगे और ईओसीएस को अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा और स्वयं सेवियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सेना द्वारा जिला शिमला में जतोग इंफेन्ट्ररी बटालियन से 11 कॉलम और 7 निरीक्षक उपलब्ध करवाए गए। इस अभ्यास के दौरान बीआरो व वायुसेना के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। अस्पतालों की तत्परता का निरीक्षण करने के लिए सेना के स्वास्थ्य अधिकारी भी तैनात किए गए थे।
आईटीबीपी द्वारा शिमला में दो कॉलम व कुल्लू और रिकांगपिओ में एक-एक टुकड़ी व काज़ा में एक प्लटून तथा ऑबजर्वर उपलब्ध कराए गए।

Desk

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