राज्यपाल ने ‘हायर एजुकेशन लीडर-फ्यूचर ऑफ लर्निंग एण्ड जॉब्स’ विषय पर आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता की।

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि हमें ग्राम अवधारणा को जीवंत रखते हुए भावी पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक परम्पराओं से अवगत करवाना चाहिए ताकि शहरीकरण को कम किया जा सके। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उच्च शैक्षणिक संस्थान अपने पाठ्यक्रम में बदलाव लाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राज्यपाल आज यहां हिमाचल प्रदेश निजी शैक्षिक संस्थान नियामक आयोग (एचपी-पीईआरसी) द्वारा ‘हायर एजुकेशन लीडर-फ्यूचर ऑफ लर्निंग एण्ड जॉब्स’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में बतौर मुख्यातिथि सम्बोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि डिग्री प्राप्त करने के पश्चात विद्यार्थी रोजगार के अवसरों की बात करते हैं तथा रोजगार प्राप्त करना ही उनका मुख्य ध्येय होता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि क्या हमारा पाठ्यक्रम एवं विचार विद्यार्थियों को रोजगार के लिए योग्य बना रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप शैक्षणिक संस्थानों में पाठ्यक्रम तैयार किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में निजी शिक्षण संस्थानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस दिशा में और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है, जिसके लिए सम्मेलनों और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी ज्ञानोपार्जन का दौर है। यह मानवता की व्यापक दृष्टि के साथ मानवीय मूल्यों की स्थापना की सदी है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में उत्कृष्टता, गुणवत्ता, प्रौद्योगिकी आदि का समावेश निश्चित रूप से सराहनीय है। आर्लेकर ने शिक्षक वर्ग से नई शिक्षा नीति का समग्र अध्ययन के उपरांत इसका सफलतापूर्वक क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि पश्चिम के देशों द्वारा हमें पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझाने का प्रयास करते हैं। परन्तु पर्यावरण हमारी संस्कृति और जीवन शैली का अभिन्न अंग रहा है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपनी संस्कृति को समझें सभी प्रश्नों का जवाब पा सकते हैं नई शिक्षा नीति इन सभी विषयों पर केंद्रित है।
उन्होंने शिक्षा के नए और पुराने पाठ्यक्रमों तथा स्वास्थ्य शिक्षा में एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसे विषयों के एकीकरण पर विशेष बल दिया।

राज्यपाल ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को रोजगार प्रमाण पत्र भी प्रदान किये।पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी एवं पंजाब जल नियमन और विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष कर्ण अवतार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि अब तक हो रहा 65 प्रतिशत निर्माण कार्य कार्बन इन्टेसिव है तथा अधिकांश देशों द्वारा इसमें वर्ष 2050 तक 25 प्रतिशत कमी लाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता की पसंद सतत् और समावेशी उत्पादों की ओर बढ़ रही है और कॉर्पोरेट रणनीतियों को भी स्थिरता और समावेश पर ध्यान देना चाहिए। इसलिए, उच्च शिक्षा के लिए रणनीति को कौशल से विशेषताओं में स्थानांतरित कर दिया गया था, उन्होंने कहा और कहा कि हरित अर्थव्यवस्था की नौकरियों में मूल्यों, दृष्टिकोण और क्षमताओं सहित विशेषताओं की आवश्यकता होती है।

इससे पूर्व, हि.प्र. निजी शैक्षणिक संस्थान विनियमन आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल अतुल कौशिक ने राज्यपाल का स्वागत किया और उन्हेें सम्मेलन के संबंध में जानकारी दी।विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और अन्य प्रबुद्ध व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।