रिंकू शर्मा धुमारवी:23/02/2021 जिला बिलासपुर में रूक्मणी कुंड स्थित है। यह लोकप्रिय कुंड धने शिवालिक हिल्स फारेस्ट के बीच में पर्वत से धिरा हुआ एक जलाशय है।आपको बताते चलें कि रूक्मणी कुंड की बिलासपुर से दूरी 28 किलोमीटर है।
रूक्मणी कुंड को रूक्मणी कुंड के बलिदान का स्थान माना जाता है हर यहां पर एक मेले का आयोजन किया जाता है।यह कुंड बहुत से गांवों के लिए पानी की आपूर्ति का स्त्रोत है। आपको बता दें कि शिमला – धर्मशाला राजमार्ग पर बिलासपुर से औहार की ओर रूक्मणी कुंड के लिए यह मार्ग जाता है।ऐसी मान्यता है कि एक बार इस स्थान में पानी की दिक्कत बहुत अधिक हो गई थी। गांव के लोगों ने यहां पर एक कुआं खोदने के बारे में विचार किया।और यहां कुआं खोदने लगें, कुएं खोदने के लिए उनके बार बार प्रयास के बावजूद पानी की कभी के कारण पूरा औहर क्षेत्र संकट में था।

कुछ समय बाद एक बार राजा को सपना आया कि यदि उनके बेटे या बहू को बलि के रूप में चढ़ाया जाएं तो इस स्थान में पानी निकल सकता है,जब इस बात की जानकारी उसकी बहू रूक्मणी को मिली तो उसके पति की उपस्थिति में खुद को पेश किया।और अपनी बली देने को कहा और राजा ने उसकी बलि दे दी। रूक्मणी के जीवन बलिदान करने पर इस स्थान पर पानी निकल आया। मान्यता है कि रूक्मणी को इस स्थान में जिंदा दफनाया गया था। आज इस स्थान को देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक यहां आते हैं। यह भी माना जाता है कि इस पानी में बहुत से ओषधि गुण पाएं जाते हैं, इस झील के पानी से त्वचा की बिमारियों का इलाज होता है, मान्यता है कि इसके बाद इस स्थान में कभी जल संकट नहीं हुआ।

शिमला – धर्मशाला (भगेड चौक) से औहर की ओर जाना होगा।औहर- गेहरवी सड़क पर आगे से रूक्मणी कुंड के लिए एक सीधा रास्ता है।औहर गेहरवी सड़क पर तीन किलोमीटर आगे को जाना है। और वहां से रूक्मणी कुंड लगभग दो किलोमीटर है। आस्था का प्रतीक माना गया है रूक्मणी कुंड।