पराशर झील के नजारे जन्नत से कम नहीं, प्राकृतिक सौंदर्य के अतिरिक्त झील में तैरता एक भूखंड।

बिलासपुर घुमारवीं: 25 जून 2022 हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित पराशर झील प्रकृति का अनुपम सौंदर्य समेटे हुए है। प्रकृति की सुंदरता के इस दार्शनिक स्थल को देखकर आपका मन रोमांचित हो जाएगा। बरसात के मौसम के बीच यहां की वादियों में हरियाली छा गई है। समंदर तल से 9 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित पराशर झील के नजारे जन्नत से कम नहीं हैं। पर्यटकों को यहां ठहरने के लिए रेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। खाने की सामग्री, पीने का पानी, दवाई व अन्य सामान अपने साथ ले जाना जरूरी है। प्राकृतिक सौंदर्य के अतिरिक्त झील में तैरता एक भूखंड भी है।

झील में तैर रहे भूखंड को स्थानीय भाषा में टाहला कहते हैं। यह सभी के लिए आश्चर्य है क्योंकि यह भूखंड झील में इधर से उधर टहलता है। झील के किनारे आकर्षक पैगोडा शैली में निर्मित मंदिर है जिसे 14वीं शताब्दी में मंडी रियासत के राजा बाणसेन ने बनवाया था।

यहां पराशर ऋषि का दो दिवसीय सरानाहुली मेला भी लगता है।
मेले में देव सुख, देव ऋषि थट्टा, सुखदेव ऋषि डगाडू और स्नोर घाटी के आराध्य देव गणपति महाराज भी पहुंचते हैं।

मंडी से पराशर झील की दूरी करीब 50 किमी है। मंडी से जोगिंद्रनगर की सड़क पर लगभग डेढ़ किमी दूर एक सडक दायीं ओर चढ़ती है। यह सड़क कटौला व कांढी होकर बागी पहुंचती है।