कश्मीर से अजय ठकुर की रिपोर्ट -: 13 साल पहले शमशाद बेगम के पति लापता हुए और वह आज तक अपने पति की राह तक रही हैं। उनका संबंध नीलम घाटी के गांव चकनार से है। चकनार नाम का यह गांव एलओसी से महज़ 50 मीटर की दूरी पर बसा हुआ है और यहां जाने की इजाज़त नहीं है।

साल 2008 की बात है। चकनार गांव की तरफ़ जाने वाला रास्ता एक भारतीय सैन्य पोस्ट से गुज़रता है। शमशाद बेगम ने अपने पति की गुमशुदगी की कहानी सुनाते हुए कहा था कि वो पाकिस्तानी सेना की एक यूनिट में धोबी की हैसियत से काम कर रहे थे लेकिन वो सरकारी मुलाज़िम नहीं थे। शमशाद बेगम कहती हैं, “एक दिन जब वो छुट्टी पर घर आ रहे थे तो रास्ते में गांव के ही दो लोग उनके साथ हो लिए। जब वे लोग सैन्य पोस्ट के पास पहुँचे तो भारतीय सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया. जब शाम तक कोई घर नहीं आया तो गांव वालों ने तलाशना शुरू किया। मेरे पति का सामान जिसमें मेरे लिए नए कपड़े भी थे, वहीं सैन्य पोस्ट के क़रीब पड़ा मिला. आज तक मेरे पति वापस नहीं आए.”कश्मीर दुनिया के उन क्षेत्रों में से एक है जहां सबसे ज़्यादा सेना तैनात है. उसे विभाजित करती हुई सीमा रेखा कई जगहों पर ऐसी है कि कोई भी धोखा खा सकता है. भारत और पाकिस्तान दोनों के सैनिक यहां तैनात हैं और दोनों एक-दूसरे पर कड़ी नज़र रखते हैं।

शमशाद बेगम कहती हैं कि वो पाकिस्तान और भारत की सरकार से गुज़ारिश करती रही हैं कि उनके पति का पता लगाया जाए। वो कहती हैं, “मैंने हर दर पर हाथ फैलाएं हैं, जब मौक़ा मिला कहती रही कि मेरे पति का पता करवाया जाए। मगर किसी ने नहीं सुनी. आख़िर में मुझे यह विधवा का कार्ड पकड़ा दिया गया. मैंने तो अपने पति को मरा हुआ नहीं देखा, किसी ने नहीं देखा मगर किसी ने ख़बर भी नहीं ली।

शमशाद बेगम की हालत यह हो गई है कि अब हंसते हुए भी उनकी आंखें नम ही रहती हैं। “मैं हर रोज़ उन्हें ख़्वाब में देखती थी…हर रोज़. मैं देखती थी कि वो ज़िंदा हैं. मुझे अभी भी यक़ीन है कि वो ज़िंदा हैं और जब तक मुझमें आख़िरी सांस है, मैं उनका इंतज़ार करूंगी. मुझे बस यह पता है कि अभी वो बस अपनी क़िस्मत में लिखी तकलीफ़ काट रहे हैं उनके पति के साथ लापता होने वाले दूसरे दो लोगों की पत्नियों ने दोबारा शादी कर ली है मगर शमशाद बेगम ने इंतज़ार करने का फ़ैसला किया है।