मौसम की बेरुखी से हिमाचल में अब टमाटर, शिमला मिर्च और मटर पर मार।

हिमाचल में मौसम की बेरुखी की मार अब खेती और बागवानी पर भी पड़ने लगी है। गेहूं तो पहले ही समय पूर्व पकने लगी है, अब टमाटर, मटर और आम की फसल पर संकट मंडरा गया है। देश-दुनिया में टमाटर के लिए मशहूर सोलन जिले में अभी तक मात्र 10 फीसदी फसल की ही रोपाई हो पाई है, जबकि बीते साल इन दिनों किसान टमाटर की आधी फसल रोप चुके थे। शिमला मिर्च का भी यही हाल है। बिना बारिश और सिंचाई के किसान सूखे खेतों में रोपाई नहीं कर पा रहे हैं।

बढ़ता तापमान उन्हें चिंता में डाल रहा है। जिला कृषि अधिकारी सीमा कंसल ने बताया कि सोलन जिले में 8100 हेक्टेयर भूमि पर टमाटर की खेती होती है, लेकिन अभी तक सिर्फ 10 फीसदी क्षेत्र में टमाटर और 20 फीसदी में शिमला मिर्च की रोपाई हो सकी है। 65 फीसदी क्षेत्रों के किसान बारिश के इंतजार में है। लोअर हिमाचल में ज्यादा गर्मी से आम उत्पादक परेशान हैं। आम के बौर पर असर पड़ना शुरू हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी ज्यादा दिन रही तो छोटे फल झड़ सकते हैं।

उधर, शिमला समेत अन्य जिलों के हरे मटर की फसल सूखे की चपेट में आने से किसानों को करोड़ों के नुकसान का अंदेशा है। कई किसानों का तो बीज का पैसा भी नहीं निकल पाएगा। शिमला के हरे मटर की महाराष्ट्र और गुजरात में भारी मांग रहती है। शिमला जिले के सब्जी उत्पादक नगदी फसल के रूप में मटर की खेती करते हैं।

राजधानी के आसपास कसुम्पटी, ठियोग, कोटखाई, चौपाल, रोहड़ू, चिड़गांव और जुब्बल में बड़े पैमाने पर किसानों ने नवंबर, दिसंबर में मटर लगाया था। 15 मार्च के बाद बारिश न होने से मटर के पौधे सूखने लगे हैं। ठियोग की धमांदरी पंचायत के बड़ोग निवासी राजेश शर्मा ने करीब दस हजार रुपये खर्च कर 15 किलो बीज लगाया था। पूरी फसल सूख गई है।

शिमला में संकट मोचन के समीप बढ़ई गांव के किसान जय शिव ठाकुर ने बताया कि अरकल किस्म का 11 किलो बीज लगाया था, बारिश न होने से पत्ते पीले पड़ने लगे हैं। जनेड़घाट के ठूंड गांव निवासी ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि 300 रुपये किलो वाला जेके किस्म का 12 किलो बीज लगाया था।

12 से 15 क्विंटल फसल लगने का अनुमान था। बारिश न होने से फलियों का साइज नहीं बढ़ा और सूख कर सफेद हो गईं। 80 हजार से एक लाख का नुकसान हो गया। ढली मंडी की करोल ब्रदर्स फर्म के संचालक अक्षय करोल ने बताया कि इस सीजन में सूखे के कारण मटर की क्वालिटी प्रभावित हुई है। बढ़िया मटर की देश भर में मांग रहती है, लेकिन इस बार सीजन की शुरुआत में क्वालिटी मटर मंडी में नहीं आ रहा है।

शिमला में सालाना 80 हजार मीट्रिक टन मटर का उत्पादन
सीजन में बढ़िया किस्म के मटर का थोक रेट 80 से 100 रुपये किलो तक रहता है। अकेले शिमला की ढली मंडी से रोजाना 300 से 400 क्विंटल मटर बाहरी राज्यों को भेजा जाता है। शिमला जिले में 7030 हेक्टेयर भूमि पर मटर की खेती होती है। किस्म के हिसाब से 60 से 120 दिन में मटर तैयार होता है। शिमला जिले में सालाना करीब 80 हजार मीट्रिक टन मटर का उत्पादन होता है।