केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने सक्रिय राजनीति से सन्यास का किया ऐलान।

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हिमाचल की राजनीति के स्तम्भ पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने सक्रिय राजनीति से सन्यास का ऐलान कर दिया है। पालमपुर में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की जनसभा में पूर्व मंत्री ने कहा कि वो 66 साल से राजनीति में सक्रिय रहे।

पालमपुर से ही राजनीतिक जीवन शुरू किया। आज यहीं से अपना आखिरी संबोधन कर रहे हैं। प्रदेश में बीजेपी को सींचने के लिए शांता कुमार ने एक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया है।

12 सितंबर 1934 को पालमपुर के जमुला गांव में जन्में शांता कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन में न केवल मुख्यमंत्री का दायित्व निभाया, बल्कि केंद्रीय मंत्री भी रहे। एलएलबी तक शिक्षा हासिल

कर चुके शांता कुमार ने 1951 में संघ प्रचारक बनने के बाद घर छोड़ दिया था। एक नामी लेखक के तौर पर भी शांता कुमार ने पहचान बनाई है। पहली बार 1972 में विधानसभा में पहुंचे थे। 1977 से 1980 तक मुख्यमंत्री के तौर पर कार्य निभाया, जबकि 1980 से 1985 तक नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई।

1990 से 1992 के बीच दूसरी मर्तबा मुख्यमंत्री का दायित्व निभाया।

केंद्र में 13 अक्तूबर 1999 1 जुलाई 2002 तक कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद 1 जुलाई 2002 से 6 अप्रैल 2003 तक केंद्रीय ग्रामीण मंत्री के तौर पर भी दायित्व निभाया।

इस दौरान केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज देष को महिलाओं की सुरक्षा के लिए भाजपा को वोट देनी होगी। उन्होंने शहीद सोमनाथ को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि पालमपुर वीरों की भूमि है, जिसने विक्रम बतरा जैसे सपूतों को भी जन्म दिया है।

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Desk

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