दिल्ली पुलिस ने जिन दूसरे किसान नेताओं के नाम एफआईआर में शामिल किए हैं उनमें दर्शन पाल, राजिंदर सिंह, बलबीर सिंह राजेवाल, बूटा सिंह बुर्जगिल और जोगिंदर सिंह उगराहा हैं। इन सभी पर ट्रैक्टर रैली के दौरान दी गई एनओसी के उल्लंघन का आरोप लगाया है। इसके साथ भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत पर भी एफआईआर दर्ज हुई है। इन नेताओं पर आईपीसी की 307 (हत्या का प्रयास), 147 (दंगा करना) और 353 (सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी में बाधा डालना) की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही पुलिस किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान गणतंत्र दिवस के दिन लाल किले पर और दिल्ली में हिंसा के मामले में 22 एफआईआर दर्ज की गई हैं। मामले की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच करेगी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि इन एफआईआर के आधार पर हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जाएगी और उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। कल की हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है वह आईपीसी सेक्शन 395 (डकैती), 397 (किसी पर जानलेवा हमला करके डकैती या लूट), 120 बी (आपराधिक षणयंत्र) समेत दूसरे धाराओं में की गई है। सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि हिंसा में 300 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। बहुत सारे वीडियो और सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं जिसमें हिंसा की घटनाएं दर्ज हुई हैं। उन्हें देखा जाएगा और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। इस बीच ट्रैक्टर रैली और पुलिस के बीच संघर्ष से फैली हिंसा के एक दिन बीत जाने के बाद बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज से हिंसा की जांच कराए जाने की मांग की गई है। हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारी लाल किले पर पहुंच गए थे और निशान साहिब का झंडा फहरा दिया था।